श्री दुर्गा पूजा महासमिति ने किया सम्मानित, लगातार उपलब्धियों से बढ़ा क्षेत्र का गौरव
खेतासराय (जौनपुर) आस्था जब समर्पण से जुड़ती है और मेहनत जब समाज के सहयोग से आकार लेती है, तो उसकी पहचान दूर तक बनती है। खेतासराय की जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति ने एक बार फिर यही मिसाल पेश की है। जनपद में आयोजित श्री दुर्गा पूजा महासमिति, जौनपुर के 47वें भव्य पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह में समिति को सम्मानित किया गया। लगातार जनपद स्तरीय सम्मान हासिल कर रहे माँ विंध्यवासिनी के पंडाल ने एक बार फिर खेतासराय का नाम जिले में गौरवान्वित किया है।
पिछले कई वर्षों से समिति द्वारा दुर्गा पूजा के दौरान भव्य पंडाल सजाया जाता है। पंडाल केवल श्रद्धा और भक्ति का केंद्र नहीं रहता, बल्कि कला, संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और सामूहिक सहभागिता की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत करता है। पंडाल की सजावट, व्यवस्था और आयोजन में कार्यकर्ताओं की मेहनत हर वर्ष अपनी अलग छाप छोड़ती है। इसी समर्पण का परिणाम है कि समिति को लगातार जनपद स्तर पर पुरस्कार और सम्मान मिल रहे हैं।
सम्मान समारोह में महासमिति के पदाधिकारियों ने समिति के आयोजन, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति ने अपनी निरंतर मेहनत से न केवल धार्मिक आयोजन को भव्यता दी है, बल्कि खेतासराय की पहचान को भी मजबूत किया है।
सम्मान की खबर क्षेत्र में पहुंचते ही समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी मेहनत का सम्मान बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी हाथों की है, जो महीनों पहले से आयोजन को सफल बनाने में जुट जाते हैं।
पंडाल के संरक्षक मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि लगातार मिल रहे जिला स्तरीय पुरस्कार और सम्मान के पीछे समिति के कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत और क्षेत्रवासियों का सहयोग है। उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास है कि आने वाले समय में आयोजन को और बेहतर बनाया जाए और जनपद में प्रथम स्थान हासिल कर खेतासराय का नाम और ऊंचा किया जाए।
वहीं पंडाल के अध्यक्ष शांतिभूषण मिश्रा ने श्री दुर्गा पूजा महासमिति जौनपुर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मिला सम्मान समिति के लिए गौरव के साथ-साथ नई जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों के सहयोग से भविष्य में आयोजन को और भव्य एवं अनुकरणीय बनाया जाएगा।
माँ के दरबार को सजाने वाले हाथों को मिला सम्मान, तो खेतासराय की आस्था का भी मान बढ़ गया। लगातार मिल रही यह उपलब्धि समिति के लिए सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मेहनत, एकजुटता और श्रद्धा की पहचान बनती जा रही है।











