मौसम समाचार – डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक
28 सितंबर को जौनपुर के आसपास के लिलो पूर्वांचल में मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा और इस वर्ष 24 सितंबर से प्रारंभ हुई ठंड अब वापस नहीं होगी और न गर्मी वापस आएगी।
15 दिनों तक वर्षा की कोई संभावना नहीं है अधिक से अधिक एक दो बार बूंदाबांदी हो सकती है न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगी अर्थात सुबह काफी ठंड रहेगी संध्या और रात का समय सुखद शीतल सुहाना रहेगा।
वायु गुणवत्ता सूचकांक भी ठीक-ठाक 50 से 100 के बीच रहेगा पराबैंगनी किरणों की तीव्रता 1 से 5 के बीच रहेगी हवाओं की दिशा और गति बदलती रहेगी मुख्य रूप से पूर्वी हवा पश्चिमी हवा में बादल जाएगी और अधिकतम तापमान भी 31 से 34 डिग्री सेल्सियस तक ही रहेगा अर्थात दोपहर को छोड़कर गर्मी और उमेश तथा पसीना समाप्त हो जाएगा।
इस वर्ष नवरात्रि दशहरा और दीपावली तथा पितृपक्ष 35 वर्ष बाद ठंड के मौसम में मनाया जाएगा ।
इस मौसम के अलावा हिमालय पर्वतीय क्षेत्र कश्मीर से अरुणाचल तक कहीं-कहीं हिमपात और अनेक स्थानों पर वर्षा जबकि दक्षिण और मध्य भारत में गर्म मौसम के साथ वर्षा होगी।
विश्व के मौसम में एक महीने के अंदर एक तेज भूकंप दो मध्यम और कई सामान्य भूकंप एक सुनामी लहर दो ज्वालामुखी विस्फोट होंगे अंतरिक्ष में बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित होंगी।
Why should one not partake of food or water at anyone’s home during the period of Pitru Paksha?
गरुड़ पुराण और धर्म दर्शन के आधार पर पितृपक्ष का संपूर्ण विवेचन – डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक
वैज्ञानिक धार्मिक और आध्यात्मिक विवेचन
सनातन हिन्दू धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि जीवन और मृत्यु दोनों आज तक विज्ञान के लिए भी सबसे जटिल पहेली है जिसे भारत के लोगों ने लाखों वर्ष पहले ही सुलझा लिया था गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
इसलिए इस दौरान भोजन का नियम सबसे कठोर है।
भाग 1 – गरुड़ पुराण क्या कहता है – अन्न ही शरीर नहीं, अन्न ही मन है
गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प, अध्याय 17 और 33 में भगवान विष्णु, गरुड़ जी को समझाते हैं –
“अन्नं ब्रह्म रसं विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः।” अन्न ब्रह्मा है, उसका रस विष्णु है, और उसे खाने वाला जीव, स्वयं महेश है। इसलिए अन्न को कभी सामान्य मत समझो।
और दूसरा श्लोक – “जैसा अन्न वैसा मन, जैसा पाणी वैसी वाणी।”
गरुड़ पुराण कहता है, अन्न के 3 दोष होते हैं, जो खाने वाले के अंदर चले जाते हैं –
1. जाति दोष – अन्न किसने उगाया? किस भाव से उगाया? अगर किसान ने लोभ, क्रोध से उगाया, तो वह भाव अन्न में आएगा।
2. निमित्त दोष – अन्न बनाते समय, बनाने वाले के मन में क्या था? अगर रसोई में झगड़ा हो रहा है, गाली दी जा रही है, तो वह अन्न विष बन जाता है। इसलिए कहा – रसोई में कभी अशुद्ध मन से भोजन मत बनाओ।
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3. आश्रय दोष – अन्न किसके घर का है? किसके पैसे से आया? अगर वह पैसा पाप से, चोरी से, ब्याज से, धोखे से आया है, तो उस अन्न में पाप का अंश आ जाता है।
पितृपक्ष में यही तीसरा दोष, सबसे खतरनाक हो जाता है।
भाग 2 – पितृपक्ष में आपके साथ कौन रहता है? – सूक्ष्म विज्ञान
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद जीव के 2 शरीर बचते हैं – सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। पितृपक्ष में यमराज, पितरों को 16 दिन के लिए, पितृलोक से मुक्त करते हैं, वे अपने पुत्र-पौत्रों के घर आते हैं, उनके द्वार पर, उनकी रसोई में, उनकी छाया में रहते हैं।
वे कुछ खाते नहीं, वे केवल गंध और भाव ग्रहण करते हैं।
आप जो भी खाते हो, जो भी सोचते हो, उसका सूक्ष्म अंश, आपके पितरों को जाता है।
अब सोचो, आप किसी और के घर खाते हो –
उस घर में मांस-मदिरा बनता हो, तो उसका दोष आपके पितरों को जाएगा।
उस घर में पितरों का श्राद्ध न होता हो, पितर अतृप्त हों, तो उनकी अतृप्ति, ईर्ष्या, आपके पितरों से टकराएगी।
उस घर का पैसा, अगर अधर्म से आया है, तो आपके पितर भी उस पाप के भागी बनेंगे।
इसलिए गरुड़ पुराण कहता है – पितृपक्ष में पुत्र, पितरों के लिए एक “पवित्र घड़ा” है, अगर घड़ा गंदा हो गया, तो पितर जल कैसे पिएंगे?
आपका शरीर ही वह घड़ा है, और अन्न-जल ही उस घड़े का जल है।
भाग 3 – 5 कारण – क्यों नहीं खाना चाहिए दूसरों के घर – गरुड़ पुराण के अनुसार
कारण 1 – आपका शरीर पितरों के लिए यज्ञशाला बन जाता है
इन 16 दिनों में, जब आप तर्पण करते हो, पिंडदान करते हो, ब्राह्मण को भोजन कराते हो, तो आपके पितर, आपके माध्यम से ही तृप्त होते हैं। गरुड़ पुराण कहता है – पुत्र की नाभि से, एक सूक्ष्म नाड़ी, पितरों तक जाती है। जो पुत्र खाता है, वही पितरों को सूक्ष्म रूप में मिलता है।
अगर आप बाहर का, अपवित्र, रजोगुणी, तामसिक अन्न खाओगे, तो आपके पितरों को भी वही मिलेगा, वे तृप्त होने की जगह, और अशांत हो जाएंगे। इसलिए कहा – “स्वगृहे भोजनं कुर्यात्” – अपने घर का ही भोजन करो।
कारण 2 – दूसरे के घर का अन्न, आपके व्रत को तोड़ देता है
पितृपक्ष, एक व्रत है, 16 दिन का महाव्रत। जैसे नवरात्रि में 9 दिन व्रत में, आप बाहर का नहीं खाते, क्योंकि आप देवी के लिए पवित्र हो, वैसे ही पितृपक्ष में आप पितरों के लिए पवित्र हो।
गरुड़ पुराण कहता है – जो व्यक्ति पितृपक्ष में दूसरे के घर अन्न खाता है, उसका श्राद्ध, पितर ग्रहण नहीं करते, उसके पिंड, कौवे भी नहीं खाते, क्योंकि उसके पिंड में, दूसरे के घर की अशुद्धि आ जाती है।
श्लोक है – “परान्नं च परवस्त्रं परशय्या परस्त्रियः, पितृपक्षे विवर्जयेत्।” पितृपक्ष में दूसरे का अन्न, दूसरे का वस्त्र, दूसरे की शय्या, और परस्त्री का संग, त्याग देना चाहिए।
कारण 3 – कर्ज का सिद्धांत – अन्न का कर्ज सबसे बड़ा कर्ज
सनातन धर्म में, अन्न का कर्ज, कभी न उतरने वाला कर्ज माना गया है। आपने किसी के घर खाया, तो आप उसके कर्जदार हो गए, सूक्ष्म रूप से।
पितृपक्ष में, आपको केवल 3 के कर्जदार रहना है – देव कर्ज, ऋषि कर्ज, पितृ कर्ज। अगर आपने चौथा कर्ज – मनुष्य का कर्ज – ले लिया, दूसरे के घर खाकर, तो आपके पितृ, आपको श्राप देकर जाएंगे, क्योंकि आपने उनका हिस्सा, दूसरे को दे दिया।
गरुड़ पुराण में कथा है – एक ब्राह्मण ने पितृपक्ष में अपने मित्र के घर खीर खाई, उसके पितर, भूखे ही पितृलोक लौट गए, क्योंकि उस खीर पर, मित्र की कामना थी – “मेरा काम हो जाए”, पितरों ने कहा – “तूने हमारा अन्न, दूसरे की कामना को दे दिया, जा, तुझे पितृदोष लगेगा।”
कारण 4 – प्रेत और पिशाच बाधा से बचाव
गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प में, प्रेतों के 18 प्रकार बताता है – जो पितृपक्ष में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, क्योंकि इस दौरान यमलोक के द्वार खुले होते हैं।
जब आप किसी अनजान घर, होटल, ढाबे, या ऐसे घर में खाते हो, जहाँ का शुद्ध-अशुद्ध पता नहीं, जहाँ लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा बनता हो, तो उस अन्न के साथ, प्रेतों की सूक्ष्म ऊर्जा, आपके शरीर में प्रवेश कर जाती है।
और जब आपके शरीर में पितर भी हैं, और बाहर से प्रेत भी आ गया, तो दोनों में युद्ध होता है, इसी को पितृदोष, नजर दोष, घर में क्लेश कहा जाता है।
इसलिए पुराने लोग कहते थे – पितृपक्ष में होटल का मत खाओ, बाहर का मत खाओ, अपने हाथ से बना, सादा, सात्विक खाओ।
कारण 5 – आपके पुण्य का अंतरण हो जाता है
गरुड़ पुराण का सबसे गुप्त सिद्धांत – अन्न दान, पुण्य का अंतरण है।
जब आप किसी के घर खाते हो, तो अनजाने में, आपका 1 दिन का श्राद्ध-पुण्य, उस घर के पितरों को चला जाता है, और आपके पितर खाली हाथ रह जाते हैं।
जैसे मोबाइल से पैसा स्थानान्तरित होता है, वैसे ही अन्न से पुण्य स्थानांतरित होता है, इसलिए पितृपक्ष में केवल उसी के घर खाना चाहिए, जिसके पितर, आपके पितरों के मित्र हों, यानी आपका अपना परिवार, आपका अपना घर।
भाग 4 – किन-किन जगहों पर बिल्कुल नहीं खाना चाहिए – गरुड़ पुराण की सूची
गरुड़ पुराण में, 8 जगहों का अन्न, पितृपक्ष में महापाप बताया गया है –
शूद्र या अपवित्र व्यक्ति के घर – जहाँ शौच-अशौच का ध्यान न हो।
शराबी, मांसाहारी के घर – जहाँ जीव हत्या होती हो।
पुत्रहीन, श्राद्धहीन घर में – जहाँ कभी पितरों के नाम पर दीया भी न जलता हो, वहाँ के पितर अतृप्त हैं, वे आपका पुण्य छीन लेंगे।
वेश्या, परस्त्रीगामी के घर – जहाँ काम वासना का वास हो।
ब्याज, चोरी, रिश्वत से कमाने वाले के घर – उसका पैसा अपवित्र है।
श्राद्ध के दिन, निमंत्रण के बिना, दूसरे के घर – जो श्राद्ध में बिना बुलाए जाता है, वह पाप खाता है।
होटल, ढाबा, बाजार का भोजन – जहाँ बनाने वाले का पता नहीं, वहाँ 100 लोगों की वासना, उस अन्न में होती है।
दूसरे के श्राद्ध का बचा हुआ अन्न – अगर किसी और ने अपने पितरों के नाम पर ब्राह्मण को खिलाया, और वह बच गया, उसे कभी मत खाओ, वह सीधे पितरों का अन्न है, उसे खाने से पितृदोष लगता है।
भाग 5 – क्या खाना चाहिए, कैसे खाना चाहिए – पितृपक्ष का आहार विधान
तो फिर खाना क्या चाहिए? गरुड़ पुराण, अध्याय 21 में आहार विधान देता है –
खाने योग्य –
अपने घर में, अपने हाथ से, या पत्नी, माता, पुत्री के हाथ से बना, गाय के घी में बना, सादा भोजन।
बिना लहसुन-प्याज का, बिना मसूर, उड़द, चना, हींग का – क्योंकि ये तामसिक हैं, पितरों को उत्तेजित करते हैं।
जल का नियम – पितृपक्ष में पानी भी, किसी के घर का नहीं पीना चाहिए, खासकर जो तामसिक हो। अपना पानी, अपने घर का, या गंगा जल, या कुएं का साफ पानी। क्योंकि जल भी, अन्न की तरह, भाव ग्रहण करता है।
कहा गया है – “जलं पीत्वा परगृहे, पितृणां तृप्ति नश्यति।” दूसरे के घर जल पीने से, पितरों की तृप्ति नष्ट हो जाती है।
भाग 6 – अपवाद – कब दूसरे के घर खा सकते हैं?
गरुड़ पुराण, कठोर है, पर करुण भी है, 3 अपवाद देता है –
1. गुरु के घर – अपने गुरु, आचार्य, ज्ञानी ब्राह्मण के घर, पितृपक्ष में खा सकते हैं, क्योंकि गुरु का अन्न, अमृत है, वह आपके पितरों को भी तृप्त करता है।
2. पुत्री के घर – पिता, अपनी विवाहित पुत्री के घर, पितृपक्ष में अन्न नहीं खाता, यह नियम है, पर पुत्री, अपने पिता के घर खा सकती है, क्योंकि पुत्री का संबंध, पिता के पितरों से भी है।
3. आपातकाल में – अगर आप यात्रा में हो, बीमार हो, और अपना भोजन संभव नहीं, तो फल, दूध, गंगा जल लेकर, “पितृभ्यो नमः” कहकर, भगवान विष्णु को अर्पण करके, खा सकते हैं, दोष नहीं लगेगा, क्योंकि भाव शुद्ध है।
पर होटल, मित्र के घर पार्टी, शादी, बर्थडे में, पितृपक्ष में जाना, और वहां खाना, गरुड़ पुराण में महादोष कहा गया है, इससे पितृ नाराज होकर, पितृदोष देते हैं – घर में क्लेश, संतान बाधा, धन हानि, बीमारी।
भाग 7 – आज के जीवन में कैसे पालन करें – प्रायोगिक उपाय
आज तो नौकरी है, बाहर रहना पड़ता है, तो कैसे करें? 5 उपाय –
1. टिफिन ले जाओ – 16 दिन, अपने घर से टिफिन ले जाओ, कार्यालय में भी अपना ही खाओ।
2. फलाहार करो – अगर बाहर हो, तो केवल फल, दूध, मूंगफली, गंगा जल, तुलसी दल लो, यह पवित्र है।
3. मानसिक क्षमा मांगो – अगर गलती से, बाहर खा लिया, तो रात को, दक्षिण दिशा में मुंह करके, हाथ में जल लेकर, कहो – “हे मेरे पितरो, आज मैंने अज्ञान में, दूसरे का वर्जित अन्न ग्रहण किया, मुझे क्षमा करो, मैं कल से ध्यान रखूंगा, और इसके प्रायश्चित में, मैं एक ब्राह्मण को भोजन कराऊंगा, या गाय को चारा दूंगा।”
4. गायत्री मंत्र से शुद्धि – भोजन से पहले, 3 बार गायत्री मंत्र पढ़कर, भोजन पर फूंक मारो, तो उसका दोष 50% कम हो जाता है, यह गरुड़ पुराण का ही उपाय है।
5. तुलसी दल डालो – कोई भी भोजन, जल, अगर बाहर का लेना ही पड़े, तो उसमें तुलसी का पत्ता डाल दो, तुलसी, विष्णु प्रिया है, वह हर अन्न को पवित्र कर देती है, प्रेत बाधा नहीं आने देती।
अंतिम – पितृपक्ष, भूखे रहने का नहीं, पवित्र रहने का पर्व है
पितृपक्ष, डरने का पर्व नहीं, प्रेम का पर्व है, 16 दिन, आपके पितर, आपके मेहमान हैं, जैसे घर में मेहमान आए तो आप घर साफ रखते हो, बाहर का गंदा नहीं खाते, वैसे ही।
गरुड़ पुराण का सार, एक ही लाइन में –
“पितृपक्षे परान्नं यस्तु भुंक्ते मोहात् नराधमः, तस्य पितरो निराशा वै प्रयान्ति यममंदिरम्।” जो मनुष्य, मोहवश, पितृपक्ष में दूसरे का अन्न खाता है, उसके पितर निराश होकर, यमलोक लौट जाते हैं, और उसे श्राप देकर जाते हैं।
और जो व्यक्ति, 16 दिन, अपने घर का, पवित्र, सात्विक अन्न, पितरों को याद करके खाता है, उसके पितर, उसे आशीर्वाद देते हैं – “धनं धान्यं संतानं, सुखं समृद्धि वर्धताम्।”
इसलिए इस पितृपक्ष, प्रण लो – बाहर का नहीं, अपना खाऊंगा, पवित्र खाऊंगा, पितरों को तृप्त करूंगा। क्योंकि अन्न ही मन है, और मन ही पितरों तक जाता है।
दुर्गा मंदिर परिसर में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया जनजागरूकता का संदेश
खेतासराय (जौनपुर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत रविवार को दुर्गा मंदिर परिसर में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक जागरूकता और सेवा भावना का संदेश दिया। नाटक के जरिए लोगों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला महामंत्री व मंत्री प्रतिनिधि अजय सिंह रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सेवा और जनकल्याण की भावना समाज को मजबूत बनाने का कार्य करती है। सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुँचाने के साथ ही समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना भी जरूरी है।
नुक्कड़ नाटक के दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम देखने के लिए मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटी रही। कलाकारों ने मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित लोगों को महत्वपूर्ण संदेश मिला।
इस दौरान आयोजकों ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सेवा और जागरूकता का सन्देश पहुँचाना है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सरकार की योजनाओं और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से अधिशाषी अधिकारी अलका मौर्या जिला मंत्री धर्मेंद्र मिश्रा, जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय, डॉ. गजेंद्र पाण्डेय, कपूरचन्द्र जायसवाल, उमेश सिंह, मुकेश प्रजापति, वंश श्रीवास्तव, अनिल प्रजापति, हरेंद्र यादव, पुष्पा चौबे, प्रद्युम्न तिवारी, गर्जुन बिन्द उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे आयोजक मण्डल अध्यक्ष उपेन्द्र नाथ मिश्रा आगन्तुको के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालक मण्डल महामंत्री मनीष गुप्ता ने किया।
दुकान से घर लौटते समय हुआ हादसा, पुलिस ने शव कब्जे में लेकर भेजा पोस्टमार्टम के लिए
खेतासराय (जौनपुर): कलापुर बाजार से करीब पाँच सौ मीटर पहले रविवार को धान के खेत में एक अधेड़ का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जाँच में तेज आंधी-बारिश के बीच साइकिल से अनियंत्रित होकर पानी भरे खेत में गिरने से मौत होने की आशंका जताई जा रही है।
मृतक की पहचान विनोद गौतम (43) पुत्र नंदलाल गौतम निवासी कबीरुद्दीनपुर, थाना खुटहन, जौनपुर के रूप में हुई। बताया गया कि विनोद आदमपुर में दाढ़ी-बाल बनाने का कार्य करता था। पुलिस के अनुसार, वह शराब पीने का आदी था।
बताया गया कि शनिवार रात करीब वह अपनी दुकान से साइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान क्षेत्र में तेज आंधी-बारिश हो रही थी। आशंका है कि अत्यधिक नशे की हालत में साइकिल चलाते समय वह अपना सन्तुलन खो बैठा और सड़क किनारे स्थित पानी भरे धान के खेत में जा गिरा। गिरने से उसे चोट आई और पानी भरे खेत में चले जाने के कारण उसकी मौत हो गई।
रविवार को खेत में शव दिखाई देने पर ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने जाँच-पड़ताल के बाद शव को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
घटना के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। घटना को लेकर क्षेत्र में फिलहाल शांति व्यवस्था कायम है।
खेतासराय-खुटहन मार्ग पर करीब एक घंटे तक आवागमन प्रभावित
खेतासराय (जौनपुर): खेतासराय-खुटहन मुख्य मार्ग पर शनिवार की तड़के राखड़ लदा ट्रक बीच सड़क पर खराब हो जाने से आवागमन बाधित हो गया। ट्रक का सापट टूटने के कारण वह ऋषि तालाब के समीप अचानक सड़क पर खड़ा हो गया। पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी रुक गए, जिससे मार्ग पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
जानकारी के अनुसार सिंगरौली से राखड़ लादकर एक ट्रक क्षेत्र के खुदौली में निर्माणाधीन बाईपास के लिए जा रहा था। खेतासराय चौराहे से खुटहन मार्ग की ओर मुड़ने के बाद ऋषि तालाब के समीप अचानक ट्रक का सापट टूट गया। इससे ट्रक बीच सड़क पर खड़ा हो गया। देखते ही देखते पीछे वाहनों की कतार लग गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने वाहनों को धीरे-धीरे पास कराकर आवागमन सुचारु कराने का प्रयास किया। मिर्जापुर निवासी ट्रक चालक रामलल्लन ने बताया कि सापट मंगवाकर मैकेनिक से लगवाया गया। इसके बाद ट्रक को सड़क से हटाकर आगे रवाना किया जा सका। इस दौरान करीब एक घंटे तक मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा।
खेतासराय (जौनपुर): शनिवार को तेज आंधी के चलते वाराणसी-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित आज़ाद रेलवे क्रासिंग के समीप एक पेड़ अचानक गिर गया। पेड़ गिरने से मार्ग पर कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। सड़क पर पेड़ गिरने की सूचना से राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई।
आंधी के दौरान पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि गनीमत रही कि जिस समय पेड़ गिरा, उस वक्त उसकी चपेट में कोई वाहन या राहगीर नहीं आया। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। पेड़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क से उसे हटाने का प्रयास किया, जिससे आवागमन सामान्य हो सका।
जौनपुर से हजारों शिक्षक-कर्मचारियों ने इको गार्डन पहुंचकर दर्ज कराई सहभागिता
जौनपुर। भयंकर बारिश के बावजूद पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण समाप्ति की मांग को लेकर शिक्षक-कर्मचारियों का उत्साह और एकजुटता कमजोर नहीं पड़ी। जौनपुर जनपद से बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी अपने-अपने घरों से निकलकर लखनऊ स्थित इको गार्डन पहुंचे और आयोजित जनसमागम में अपनी मांगों को मजबूती से उठाया।
बारिश की लगातार होती बूंदों के बीच भी शिक्षक-कर्मचारियों का उत्साह देखते ही बना। जनसमागम में पुरानी पेंशन बहाली तथा निजीकरण की समाप्ति को लेकर आवाज बुलंद की गई। उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि उनके अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को लेकर संघर्ष और एकजुटता निरंतर जारी रहेगी।
जौनपुर से पहुंचे शिक्षक-कर्मचारियों का नेतृत्व मंडल उपाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव ने किया। रमेश चंद्र यादव पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। इस अवसर पर मांडलिक महामंत्री संदीप चौधरी, जिला महामंत्री इंदु प्रकाश यादव, जिला संयोजक चंदन सिंह, जिला कोषाध्यक्ष नंदलाल पुष्पक, डॉ. राजेश उपाध्याय, सुभाष सरोज, टी.एन. यादव,अरविंद यादव ,संदीप यादव,सुरेंद्र सरोज ,प्रदीप चौहान, प्रमोद प्रजापति, मनीष यादव, आनंद स्वरूप, शेरबहादुर, आशीष लोहिया, प्रदीप उपाध्याय, कृपानिधि, लालबहादुर यादव, के.के. गुप्ता, नागेंद्र, लालचंद, गौरव यादव, संदीप यादव, विवेक सिंह एवं रोहित सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर इंदु प्रकाश यादव, जिला महामंत्री अटेवा जौनपुर ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली और निजीकरण की समाप्ति शिक्षक-कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर शिक्षक-कर्मचारी संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज लगातार उठाते रहेंगे।
भारी बारिश के बावजूद इको गार्डन में जुटी शिक्षक-कर्मचारियों की बड़ी संख्या ने कार्यक्रम में उत्साह और एकजुटता का वातावरण बनाया। जौनपुर से हुई व्यापक सहभागिता को शिक्षक-कर्मचारी संगठन की सक्रियता और संगठनात्मक एकजुटता के रूप में देखा गया।
एक पखवाड़े से बीएसएनएल नेटवर्क फेल, उपभोक्ता हलकान
कॉल ड्रॉप और इंटरनेट की बदहाल सेवा से बढ़ी मुश्किलें, जरूरी कामकाज पर पड़ रहा असर
खेतासराय (जौनपुर):* कस्बे में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की मोबाइल नेटवर्क व्यवस्था पिछले करीब एक पखवाड़े से बेपटरी है। नेटवर्क की लगातार खराबी ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मोबाइल में सिग्नल दिखाई देने के बावजूद कॉल न लगना, बातचीत के दौरान बार-बार कॉल ड्रॉप होना और इंटरनेट की बेहद धीमी रफ्तार से उपभोक्ताओं में मायूसी और नाराजगी है। लम्बे समय से जारी इस अव्यवस्था के कारण बीएसएनएल उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था मानो ठहर सी गई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल फोन आज जिन्दगी की बुनियादी जरूरत बन चुका है। ऐसे में नेटवर्क की बदहाली ने सिर्फ बातचीत ही नहीं, बल्कि कई जरूरी कामों को भी प्रभावित कर दिया है। किसी को जरूरी फोन करना हो तो पहले कई बार नेटवर्क का इंतजार करना पड़ता है। कॉल लग भी जाए तो बातचीत के बीच अचानक सम्पर्क टूट जाता है। कई उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति लगातार परेशानी और झुंझलाहट का सबब बनी हुई है।
सिग्नल दिखता है, मगर सम्पर्क नहीं होता
सबसे अधिक परेशानी इस बात को लेकर है कि मोबाइल स्क्रीन पर नेटवर्क के सिग्नल दिखाई देते हैं, लेकिन कॉल करने पर कनेक्शन नहीं हो पाता। कई बार नम्बर मिलाने के बाद कॉल कट जाती है तो कई बार सामने वाले तक आवाज पहुंचने में दिक्कत होती है। बातचीत के दौरान आवाज टूटने और कॉल ड्रॉप होने से जरूरी संवाद भी अधूरा रह जाता है। इससे उपभोक्ताओं को बार-बार फोन मिलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
धीमा इंटरनेट बना मुसीबत
नेटवर्क की खराबी का असर इंटरनेट सेवा पर भी साफ दिखाई दे रहा है। इंटरनेट की रफ्तार इतनी धीमी हो जा रही है कि सामान्य ऑनलाइन कार्य करने में भी काफी वक्त लग रहा है। ऑनलाइन भुगतान, बैंकिंग, जरूरी दस्तावेज डाउनलोड करने, सन्देश भेजने तथा अन्य डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल में उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। डिजिटल दौर में इंटरनेट की इस बदहाल स्थिति ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
दूसरे नेटवर्क का लेना पड़ रहा सहारा
स्थानीय उपभोक्ताओं के मुताबिक लगातार खराब सेवा के कारण कई लोग जरूरी बातचीत और ऑनलाइन काम के लिए दूसरे मोबाइल नेटवर्क का सहारा लेने को मजबूर हैं। जिन उपभोक्ताओं ने बीएसएनएल की सेवा पर भरोसा कर रखा है, उनके सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर कब तक इस तकनीकी दुश्वारी का सामना करना पड़ेगा। उपभोक्ताओं का कहना है कि नेटवर्क जैसी बुनियादी सेवा में इतने लंबे समय तक खलल रहना चिंता का विषय है। शिकायत और उम्मीद के बीच उपभोक्ता लगातार परेशान हैं। उनका कहना है कि मोबाइल नेटवर्क सिर्फ फोन पर बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि आज शिक्षा, कारोबार, बैंकिंग और जरूरी सूचनाओं तक पहुंच का अहम माध्यम बन चुका है।
उपभोक्ताओं में नाराजगी, जल्द समाधान की मांग
करीब एक पखवाड़े से चली आ रही नेटवर्क की इस समस्या को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर नेटवर्क व्यवस्था की तकनीकी खामी को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि अब निर्बाध और बेहतर नेटवर्क सेवा की दरकार है, ताकि मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े जरूरी काम बिना किसी रुकावट के हो सकें। इस सबन्ध में टीडीएम अंकुर तिवारी ने बताया कि एयरटेल द्वारा कार्य किया गया, जिससे हमारी केबल कट गई है, टीम द्वारा फाल्ट को ढूढ़ लिया गया है, रात तक या फिर कल तक समस्या का समाधान हो जाएगा।
Jaunpur News: अटेवा पेंशन बचाओ मंच जौनपुर के ब्लॉक इकाई बरसठी का अध्यक्ष नागेन्द्र प्रताप एवं शैलेन्द्र कुमार महामंत्री निर्वाचित हुए। सरोज यादव अटेवा बरसठी महिला विंग की अध्यक्ष निर्वाचित हुई। अटेवा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष सतेंद्र राय , प्रदेश सह संयोजक महिला विंग डॉ यामिनी सिंह, मण्डल उपाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव एवं माण्डलिक महामंत्री सन्दीप कुमार चौधरी की गरिमामय उपस्थिति में तथा जिला संयोजक चन्दन सिंह, जिला महामंत्री इन्दु प्रकाश यादव , जिला कोषाध्यक्ष नन्द लाल पुष्पक के नेतृत्व में ब्लॉक इकाई बरसठी का पुनर्गठन किया गया। पुनर्गठन प्रभारी सुबाष सरोज, प्रमोद कुमार प्रजापति एवं विनोद कुमार यादव रहे। पुनर्गठन कार्यक्रम में पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रत्ती लाल निषाद को संरक्षक, अनुज पाण्डेय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कृष्ण कुमार राय कोषाध्यक्ष, सूर्यमणि एवं विवेक शुक्ल उपाध्यक्ष, संतोष कुमार कैडर प्रभारी, राजीव मौर्य सह कैडर प्रभारी, अमरजीत यादव एवं राजेंद्र प्रसाद प्रवक्ता, वीरेंद्र कुमार एवं जय सिंह संगठन मंत्री, शैलेष कुमार पांडेय एवं अफसर अली मीडिया प्रभारी, सुनील कुमार सोशल मीडिया प्रभारी, बसन्त लाल सरोज, दिलीप प्रजापति एवं परमेश्वर संयुक्त मंत्री तथा रोहित कुमार प्रचार मंत्री निर्वाचित हुए।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष सतेंद्र राय ने 25 सितम्बर को अधिक से अधिक लखनऊ चलने का आवाह्न किया, प्रदेश सह संयोजिका महिला विंग डॉ यामिनी सिंह ने मातृ शक्तियों का आवाह्न किया कि अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुँचकर पेंशन आंदोलन को सम्बल प्रदान करें,मण्डल उपाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव ने संगठित होकर पेंशन आंदोलन मजबूती प्रदान करने का आवाह्न किया , माण्डलिक महामंत्री सन्दीप चौधरी ने अटेवा के संघर्ष गौरव से परिचय कराया। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ श्याम सुंदर उपाध्याय , जिला उपाध्यक्ष डॉ राजेश उपाध्याय,जिला कैडर प्रभारी टी यन यादव, सह कैडर प्रभारी प्रदीप चौहान, जिला आई टी सेल प्रभारी अखिलेश सिंह, अध्यक्ष सिकरारा डॉ कृपा निधि यादव, अध्यक्ष करंजाकला प्रदीप उपाध्याय, अध्यक्ष मछलीशहर अखिलेश यादव, अध्यक्ष रामनगर शेर बहादुर,अध्यक्ष रामपुर माणिक चन्द्र पटेल, .. एवं विकास खण्ड बरसठी के सैकड़ों शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आशीष यादव, डॉ कृपा निधि यादव एवं ओमप्रकाश अम्बेडकर ने अपने गीतों के माध्यम से कार्यक्रम को खुशनुमा और उत्साहवर्धक बनाये रखा। कार्यक्रम का संचालन जिला संगठन मंत्री सुबाष सरोज एवं जिला कोषाध्यक्ष नन्द लाल पुष्पक ने किया।
जौनपुर/शाहगंज: पुरानी पेंशन बहाली के लिए 25 सितंबर 2026 को लखनऊ में प्रस्तावित विशाल शिक्षक-कर्मचारी रैली को सफल बनाने हेतु अटेवा पेंशन बचाओ मंच, जौनपुर के जिला महामंत्री इंदु प्रकाश यादव जी के नेतृत्व में सदस्यता, जागरूकता सहयोग अभियान निरंतर जारी है।
इसी क्रम में आज शाहगंज ब्लॉक के रानीमऊ न्याय पंचायत अंतर्गत पी.एम. श्री विद्यालय चकराज सहावे एवं प्राथमिक विद्यालय ढंढवारा कला सहित अन्य विद्यालयों में जनसंपर्क कर शिक्षकों को लखनऊ चलने के लिए आमंत्रित किया गया।
रानीमऊ न्याय पंचायत से सक्रिय सदस्यों के रूप में श्री ओमप्रकाश वर्मा, श्री विनोद कुमार प्रजापति, श्री कौशल सिंह, श्री राम नवल यादव एवं श्री विजय कुमार का चयन किया गया।
इस अवसर पर अटेवा शाहगंज के तहसील अध्यक्ष डॉ. ध्रुवराज योगी जी ने कंपोजिट विद्यालय मनेछा के समस्त स्टाफ सहित लगभग 50 शिक्षकों को अटेवा की सदस्यता ग्रहण कराई और 25 सितंबर के ऐतिहासिक पेंशन आंदोलन के लिए जागरूक किया। उन्होंने न्याय पंचायत के समस्त अध्यापकों का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। सभी साथियों ने एक स्वर में हुंकार भरी – पुरानी पेंशन लेकर रहेंगे!